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रक्षाबंधन पर हिंदी निबंध | Essay on Rakhsha Bandhan

रूपरेखा-प्रस्तावना, हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में रक्षाबंधन का महत्व, रक्षाबंधन को मनाने की विधि, त्योहार से सम्बन्धित कहानी और घटनाओं का वर्णन, उपसंहार।

हिन्दुओं के चार प्रमुख त्योहार हैं-दशहरा, दीपावली, रक्षाबंधन और होली। इनमें रक्षाबंधन भाई और बहन के असीन स्नेह को प्रकट करने वाला त्योहार है। यह प्राचीनकाल से भारतवर्ष में मनाया जाता है। इस त्योहार को ‘सलूनो’ भी कहा जाता है। रक्षाबंधन के दिन बहने भाइयों के हाथों पर रखी बाँधती हैं। पुराने समय में चावल की पोटली को लाल कलावे में बाँधकर राखी बनाई जाती थीं। किन्तु आजकल तो बाजारों में बड़ी सुन्दर राखियाँ बिकती हैं। राखी के त्योहार से कई दिन पहिले से ही राखियों की बिक्री आरम्भ हो जाती है। राखी बेचने वालों की दुकानें रंग-बिरंगी राखियों से जगमगा उठती हैं और वहाँ ग्राहकों की भीड़ दिखाई देने लगती है। इस दिन घरों में मीठे जवे, सेवई तथा खीर आदि बनाई जाती है। दीवारों पर चित्र बनाए जाते हैं और पूजा होती है। पूजा के बाद हने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं। यह राखी उनके अटूट बंधन को प्रकट करती हैं। भाई अपनी बहन को रक्षा का वचन देते हैं और बहन को रुपये आदि देकर प्रसन्न करते हैं। इसी दिन ब्राह्मण भी व्यक्तियों की कलाई पर राखी बाँधकर उनके सुख की कामना करते हैं तथा दक्षिणा पाते हैं।

प्राचीनकाल से इस त्योहार के बारे में अनेक कथाएँ प्रचलित हैं। इनमें से एक कहानी तो बहुत प्रसिद्ध हैं- कहते है कि एक बार देवताओं और राक्षसों में भयंकर युद्ध छिड़ गया। धीरे-धीरे देवताओं का बल घटने लगा और ऐसा लगने लगा, जैसे देवता हार जाएँगे। देवताओं के राजा इंद्र को इससे बड़ी चिंता हुई। इन्द्र के गुरु ने विजय के लिए श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन इन्द्र के हाथ पर रक्षा-कवच बाँधा और इसके प्रभाव से राक्षस हार गए। कहा जाता है कि तभी से रक्षाबंधन का यह त्योहार आज तक मनाया जाता है। भारतीय इतिहास में भी राखी से सम्बन्धित एक कथा प्रचलित है। एक बार चित्तौड़ की रक्षा के लिए भी बुलाया। हुमायूँ उस समय एक युद्ध में फँसा हआ था। किन्तु वह राखी के महत्व को भली प्रकार समझता था। इसलिए वह तुरन्त चित्तौड़ की रक्षा के लिए चल पड़ा। इस प्रकार राखी बहन और भाई के पवित्र प्रेम को प्रकट करती है। सूत के इन धागों में बहन और भाई के सम्बन्ध को अधिकाधिक दृढ़ बनाने की शक्ति होती है। रक्षाबंधन हमारा पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। हमें धन और लेन-देन के लोभ को त्यागकर इसकी पवित्रता का आदर करना चाहिए। वास्तव में यह त्योहार सभी को स्नेह और कर्तव्यपालन का संदेश प्रदान करता है। वास्तव में हमारे प्राचीन ऋषियों ने त्योहारों की जो योजना प्राचीन युग में बनाई थी, उसका महत्व आज भी ज्यों का त्यों बना है। हमें अपने इस त्योहार के प्राचीन गौरव को सदैव ही स्मरण रखना चाहिए तथा इसे बड़े ही उल्लास और पवित्र भाव से मनाना चाहिए।

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