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विद्यार्थी जीवन पर निबंध | Essay on Student Life

रूपरेखा-विद्यार्थी जीवन का महत्व, विद्यार्थी जीवन का मुख्य उद्देश्य-विद्याध्ययन और स्वास्थ्य निर्माण, विद्यार्थी जीवन के सुख और कष्ट, आज के विद्यार्थी की कुछ कमियाँ, सुझाव, उपसंहार।

भारतवर्ष में मानव-जीवन को चार भागों में बाँटा गया है-1. ब्रह्मचर्य, 2. गृहस्थ, 3. वानप्रस्थ और 4. संन्यास। इनमें 5 वर्ष से 25 वर्ष तक की आयु का समय ब्रह्मचर्य कहलाता है। यह काल विद्या अध्ययन का काल होता है। इस काल में जो जितना परिश्रम कर लेता है, उसका जीवन आगे चलकर उतना ही सुखी रहता है। अत: मानव जीवन में विद्यार्थी जीवन का बहुत महत्व है। विद्यार्थी को अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य विद्या अध्ययन बनाना चाहिए। जो विद्यार्थी पढ़ने के स्थान पर इधर-उधर घूमते हैं, वे जीवन मे दुख उठाते हैं। उन्हें सब बातों को छोड़कर केवल पढ़ने में मन लगाना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी को अपने स्वास्थ्य का भी पूरा-पूरा ध्यान रखना चाहिए। यदि इस आयु में स्वास्थ्य बिगड़ जाता है तो फिर जीवनभर पछताना पड़ता है। उसे बुरी आदतें नहीं अपनानी चाहिए। इस प्रकार जो विद्यार्थी चरित्र-निर्माण, अध्ययन और शारीरिक स्वास्थ्य को अपना उद्देश्य बना लेते हैं, वे जीवन में सफलता प्राप्त कर लेते हैं। विद्यार्थी जीवन मानव-जीवन का स्वर्णकाल माना जाता है। इस काल में उसे न कमाने की चिन्ता होती है और न घर-गृहस्थी की। उसके माता-पिता उसकी प्रत्येक बात को पूरा करने को तैयार रहते हैं। उसे अच्छे से अच्छा भोजन और वस्त्र दिए जाते हैं। जितना आनन्द व्यक्ति को विद्यार्थी जीवन में मिल जाता है, उतना फिर आगे कभी नहीं मिल पाता।

भारत सरकार भी विद्यार्थी की उन्नति के लिए निरन्तर प्रयत्नशील है। विद्यार्थियों के भविष्य को अधिक उज्जवल बनाने के उद्देश्य से वर्ष 1985 में राजीव गांधी ने नई शिक्षा नीति की घोषणा की जिससे भारतीय विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य का निर्माण हो सकेगा। विद्यार्थी जीवन में अनेक कष्ट भी होते हैं। जो विद्यार्थी समझदार है वे अपना समय सैर-सपाटों या खेल-तमाशों में बरबाद नहीं करते हैं, अपितु वे रात-दिन पढ़ने में ही लगे रहते हैं। जाड़ों की ठंडी रातों में जब सारा घर आराम से सोता है तो उसे पढ़ना पड़ता है। वह रात को देर से सोता है और प्रात: जल्दी उठ जाता है। पढ़ने की चिन्ता में उसे खाना-पीना कुछ भी अच्छा नहीं लगता। परीक्षा के दिनों में तो छात्रों को घोर परिश्रम करना पड़ता है। इस प्रकार विद्यार्थी जीवन बड़ा ही कष्टमय है।

अधिकांश विद्यार्थी अपने जीवन के उद्देश्य को भूल चुके हैं, वे सैर-सपाटे, फैशन और सिनेमा देखने में ही समय नष्ट कर देते हैं। आज का विद्यार्थी विद्यालय से भागने की कोशिश करता है, वह पढ़ाई को तो बिल्कुल छोड़ देता है और किसी न किसी तरह परीक्षा पास करने की युक्ति सोचता रहता है। आज विद्यार्थी अनुशासन में रहना पसन्द नही करता। इन सब बातों के कारण ही आज का विद्यार्थी उन्नति नहीं कर रहा है। आज छात्रों को विद्याध्ययन का महत्व समझाना आवश्यक है। विद्यार्थी के माता-पिता को भी उनकी चाल-ढाल पर हर समय दृष्टि रखनी चाहिए, उनको अध्यापकों से मिलते रहना चाहिए। दूसरी ओर विद्यार्थी को ऐसी शिक्षा देनी चाहिए जो उसके जीवन को सफल बना सके। वास्तव में आज के छात्र ही कल के नागरिक है। उनकी उन्नति पर ही राष्ट्र की उन्नति आधारित है।

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