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नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर निबंध | Subhas Chandra Bose Essay in Hindi

सुभाषचंन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी, सन् 1897 ई. में उड़ीसा के कटक में हुआ था। इनके पिता का नाम जानकी नाथ बोस एवं माता का नाम प्रभावती देवी था। मात्र 15 वर्ष की आयु में इन्होंने विवेकान्द साहित्य का पूर्ण अध्ययन कर लिया था। बी.ए. की परीक्षा सन् 1919 में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। पिता की इच्छा थी कि सुभाष आई.सी.एस. बने। पिता की इच्छा पूर्ण करने इंग्लैण्ड चले गये। तथा सन् 1920 में आई.सी.एस. (भारतीय सिविल सेवा) परीक्षा उत्तीर्ण कर वरीयता सूची में चौथा स्थान प्राप्त किया। कुछ दिनों बाद नौकरी छोड़कर उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित कर दिया। सुभाषचंन्द्र बोस की क्रांन्तिकारी गतिविधियो से आतंकित अंग्रेजी सरकार ने सन् 1925 में उन्हें गिरफ्तार कर म्यांमार के मांडले जेल भेज दिया। सन् 1930 में जेल में रहते हुए उन्हें कोलकाता का महापौर चुना गया। 3 मई, सन् 1939 को इन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक नामक दल का गठन किया। 4 जुलाई सन् 1943 को सुभाषचंन्द्र बोस ने जापान में ‘आजाद हिन्द फौज’ का गठन किया। ‘आजाद हिन्द फौज के सिपाही उन्हें ‘नेजा जी’कहते थे। ‘जय हिन्द’ ​’दिल्ली चलो’ लाल किला हमारा है’ ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा आदि उनके जीवंत नारे थे।

21 अक्टूबर, सन् 1943 को आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से उन्होंने सिंगापुर में भारत की अस्थायी सरकार की स्थापना की। इस सरकार को कुल नौ देशों ने मान्यता दी। उन्होंने आजाद हिंन्द फौज का मुख्यालय सिंगापुर एव रंगून में बनाया। उन्होंने रानी झाँसी रेजीमेंट के नाम से स्त्री सैनिकों का भी एक दल बनाया।

जापानी सेना के सहयोग से आजाद हिंन्द फौज ने अंडमान और निकाबोर द्वीप पर विजय प्राप्त की। इसी क्रम में दोनों फौजों ने मिलकर इंफाल और कोहिमा पर आक्रमण किया। इन क्षेत्रों पर जीत प्राप्त कर सुभाषचंन्द्र बोस ने 22 सितम्बर 1944 को शहीदी दिवस मनाया। माना जाता है कि 18 अगस्त, सन् 1945 को हवाई अड्डे के पास उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें उनकी मृत्यु हो गई। 18 अगस्त 1945 की वह घटना आज भी भारतीय इतिहास का अनुत्तरित रहस्य है। नेताजी सुभाष चंन्द्र बोस लेखक, सैनिक, दार्शनिक, राजनीतिज्ञ, कुशल प्रशासक, सेना नायक तथा वक्ता के रूप में बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। भारत माता का यह वीर सपूत अपने अटूट मातृभूमि प्रेम के कारण इतिहास में अपना नाम सदा के लिए अमर कर गया।

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