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मदर टेरेसा का जीवन परिचय | Mother Teresa Biography in Hindi

मदर टेरेसा का पूरा नाम एग्नेकस गोन्वस्हा बोजाक्सिउ था। नौ वर्ष की उम्र में पिता का देहानत हो जाने पर परिवार चलाने के लिए माँ ने व्यापार शुरू कर दिया। इससे एग्नेस को साहस से कार्य करने की प्रेरणा मिली। बारह वर्ष की उम्र में इन्होंने नन बनने का निश्चित किया। अट्ठारह वर्ष की उम्र में नन बनने के प्रशिक्षण के लिए ये आयरलैंड गई। सन् 1928 ई. में ये केालकाता आई और सेन्ट मेरीज की प्रधानाचार्य बन गई। सन् 1947 ई. में देश के विभाजन से शरणार्थी समस्या के हल की दिशा में पीड़ितों की सेवा करेन के लिए इन्होंने प्रधानाचार्य का पद छोड़ दिया। नीली किनारे की साड़ी के वेश में वे सेवाभावी नर्स बन गई।

कॉन्वेंट छोड़ने के बाद इन्होंने नर्स की ट्रेलिंग ली और कोलकाता को कार्यक्षेत्र बनाया। इन्होंने एक स्कूल की शुरुआत से अपना कार्य आरम्भ किया। इन्होंने गरीबों को खाना खिलाना और भटके हुए बालकों के सुधार के लिए प्रतिभा सेन विद्यालय स्थापित किया। ये शहर के असहाय व्यक्ति को साथ लेकर उसकी सेवा करती थीं।

इन्होंने ‘निर्मल ह्रदय’ नामक घर की स्थापना की। इनके काम से प्रभापित होकर कोलकाता निगम ने एक पुराना मकान दे दिया। 7 अक्टूबर, 1950 ई. को इनकी संस्था ‘मिशनरीज आॅफ चैरिटीज’ को मान्यता मिली। माँ की सेवा से यह मिशन सारे विश्व में फैल गया।

मदर टेरेसा द्वारा संचालित संस्थाएँ–निर्मल ह्रदय, शिशु सदन और प्रेमघर, शान्ति नगर आदि बनाई गईं। मदर टेरेसा हाथ से स्वयं सेवाकार्य करती थीं। सत्तर वर्ष की अवस्था में भी ये दिन में इक्कीस घंण्टे काम करती थी। ये दृढ़ और निर्भीक महिला थीं।

अमेरिकी सीनेटर केनेडी ने भारत स्थित शरणार्थी शिविरों का दौरा करते हुए माँ के पवित्र हाथों को अपने सिर पर रख दिया। 5 सितम्बर, 1997 ई. को माँ का निधन हो गया। इनकी अन्तिम यात्रा में विश्व के अनेक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

मदर टेरेसा के सेवाभाव और नि:स्वार्थ कार्यो के लिए भारत और विश्व के देशों ने बड़ी धनराशियाँ और पुरस्कार दिए। इन्हें इंग्लैण्ड की महारानी द्वारा ‘आर्डर आॅफ ब्रिटिश एम्पायर’ राजकुमार फिलिप द्वारा ‘टेंपलस पुरस्कार’, अमेरिकी द्वारा ‘केनेडी पुरस्कार’, भारत सरकार द्वारा ‘नेहरू शान्ति पुरस्कार’ ‘पदम श्री’ व ‘भारत रत्न पुरस्कार’, पोप छठे का ‘पोप शान्ति पुरस्कार’ और 1979 में ‘नोबेल पुरस्कार’ से सम्मानित किय गया।

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