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चौधरी चरण सिंह का जीवन परिचय | Charan Singh Biography in Hindi

चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसम्बर, 1902 ई. को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित नूरपुर ग्राम में हुआ था। इनके पिता चौधरी मीर सिंह एक साधारण किसान थे। इनकी माँ का नाम नेत्र कौर था। चौधरी चरण सिंह ने आगरा कॉलेज से एल.एल.बी. पास करके गाजियाबाद दीवानी अदालत में वकालत शुरू कर दी। अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतन्त्रता संग्राम में इन्होंने बढ़-चढ़कर योगदान दिया।

सन् 1930 में लोनी ग्राम में नमक बनाकर नमक कानून तोड़ने के दण्डस्वरूप पहली जेल यात्रा की। भारत छोड़ो आन्दोलन के समय में सन् 1942 ई. इन्होंने भूमिगत रहकर गाजियाबाद, हापुड़, सरधना, बुलन्दशहर आदि के आसपास एक क्रान्तिकारी गुप्त संगठन बनाया और विदेशी शासन ठप्प करने की मुहिम चलाई।

15 अगस्त, 19457 ई. को भारत स्वतन्त्र होेने पर उत्तर प्रदेश मन्त्रिमण्डल मेंस्वायत शासन और स्वास्थ्य विभाग में इन्हें सभा सचिव का पद मिला। उन्होेंने जमींदारी लेखपालों की नियुक्ति की। कृषि और किसानों के हित में सनप् 1958 ई. में लागू चकबन्दी अधिनियम भी चौधरी चरण सिंह का क्रान्तिकारी कदम था। इसी वर्ष उत्तर प्रदेश में भूमि संरक्षण कानून भी पारित कराया। इन्होने कृषि आपूर्ति संस्थानों की योजना चलाई, जिससे किसानों को सस्ती खाद, बीज आदि की सुविधा प्राप्त हुई।

सन्  1967 ई. में काँग्रेस छोड़कर, 3 अप्रैल को पहली बार वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री बने। सन् 1970 ई. में वे दोबारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंन्त्री बने। सन् 1977  के आम चुनाव के बाद जनता पार्टी सरकार में वे पहले गृहंमत्री, बाद में 1979 में उपप्रधानमंत्री तथा वित्त मंत्री बने।

माननीय मोराजी देसाई के त्यागपत्र के बाद 28 जुलाई, 1979 को चौधरी चरण सिंह ने देश के प्रधानमंत्री का पद सम्भाला। उन्होंने गरीबी मिटाने और नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने का संदेश दिया। 15 अगस्त, 1979 को लाल किले की प्राचीर से उन्होंने देशवासियों को सम्बोधित करते हुए संदेश दिया, ‘राष्ट्र तभी सम्पन्न हो सकता है जब उसके ग्रामीण क्षेत्र का उन्नयन किया गया हो, तथा ग्रामीण लोगों की क्रय शक्ति अधिक हो।’

चौधरी चरण सिंह जातिवाद के घोर विरोधी थे। ईमानदार नेता के रूप में चौधरी ​चरण सिंह का जीवन खुली किताब था जिन पर कोई दोष नहीं था। उन्होंने जीवन के किसी भी क्षेत्र में भ्रष्टाचार को सहन नहीं किया। 29 मई सन् 1987 ई. को किसानों के इस सर्वप्रिय नेता का निधन हो गया।

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