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चाणक्य की जीवनी | Chanakya Biography in Hindi

चाणक्य का पूरा नाम विष्णगुप्त चाणक्य था। इन्हें कौटिल्य भी कहा जाता है ये तक्षशिला के ब्राह्राण थे। इन्होंने तक्षशिला से ज्ञानार्जन और दर्शन का अध्ययन किया। पिता की मृत्यु के बाद इनकी माता ने इनका पालन पोषण किया। मगध के राजा घनानन्द ने इन्हें दानशाला का प्रबन्धक बनाया परन्तु बाद में क्रोधी होने के कारण इन्हें पदच्युत कर दिया। चाणक्य ने नन्द वंश विनाश करने की प्रतिज्ञा की। इनकी भेंट चन्द्रगुप्त मौर्य से हुई जो मगध राज्य में सेनानायक था। वह महत्वाकांक्षी था। चन्द्रगुप्त में बल था और चाणक्य में बुद्धि। बल और बुद्धि के संयोगानुसार नवीन योजना के अनुसार चन्द्रगुुप्त ने मगध राज्य पर अधिकार कर लिया। 321 ई. पू. में उसका विधिवत् राज्याभिषेक हुआ। चन्द्रगुप्त ने चाणक्य को महामंत्री और प्रमख परामर्शदाता नियुक्त किया।

चाणक्य ने अपने महान ग्रन्थ ‘अर्थशास्त्र’ की रचना की। इसमें राजतन्त्र, निरंकुश, शासन, देशद्रोह, राजद्रोह, शान्ति, युद्ध, सन्धि, मन्त्रिपरिषद्, प्रशासकीय अधिकारियों, निरीक्षकों, उनके कत्र्तव्य, राजा के अधिकारों तथा कर्तव्यों, प्रजाहित के कार्यो, राजतत्व के श्रेष्ठ आदर्श, कर प्रणाली तथा राजनीति के विभिन्न विषयों व नीतियों का विवेचन किया गया है।

चाणक्य ने राजतन्त्र को उपयोगी संस्था माना। उसके अनुसार राजा में विशिष्ट गुण होने चाहिए। वह धर्मनिष्ठ, सत्यवादी, कृतज्ञ, बलशाली, वृद्धों का सम्मान करने वाला, उत्साही, विनयशील, विवेकी, निर्भीक, न्यायप्रिय, मृदुभाषी और कार्य निपुण होना चाहिए।

चाणक्य ने आधुनिक लोककल्याणकारी राज्य की कल्पना की। वे एक व्यवहार कुशल राजनीतिज्ञ थे। वे आधुनिक राजनीतिक विचारकों, चिन्तकों में अग्रण्री माने जाते हैं।

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