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डॉ भीमराव अम्बेडकर की जीवनी | B. R. Ambedkar Biography in Hindi

डॉ भीमराव अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 ई. में इन्दौर के महू नामक स्थान पर हुआ। इनके पिता का राम जी फौत में सूबेदार थे। इनकी माता का नाम भीमाबाई सकपाल था। 1907 ई. में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् एलफिंगस्टन कॉलेज से इन्होंने इण्टर पास की। 17 वर्ष की आयु में रमाबाई से इनका विवाह हो गया। बड़ौदा नरेश सयाजीराव ने इन्हें छात्रवृत्ति दी। 1912 ई. में इन्होंने बी.ए. पास किया। न्यूयार्क विश्वविद्यालय से 1915 ई. में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की। कोलम्बिया विश्वविद्यालय ने इन्हें डॉ. आॅफ फिलॉसफी की उपाधि दी। अर्थशास्त्र व राजनीति के अध्ययन के लिए ये लन्दन गए परन्तु सयाजीराव ने छात्रवृत्ति बन्द कर दी। ये विवश होकर स्वेदश लौटे।

31 जनवरी, 1920 ई. को इन्होंने ‘मूकनायक’ अखबार निकाला। इसका उद्देश्य जातिप्रथा की समापित तथा अस्पृश्यता का निवारण करना था। 21 मार्च, 1920 ई. में इन्होंने कोल्हापुर दलित सम्मेलन की अध्यक्षता की। कोल्हापुर नरेश ने इन्हें दलितों का उद्धारक कहा। सन् 1920 ई. में इन्होंने पुन: लन्दन जाकर वकालत पास की। 27 मई, 1935 ई. को इनकी पत्नी रमाबाई का निधन हो गया।

सन् 1936 ई. में इन्होंने ‘इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी’ राजनैतिक दल का गठन किया। 1937 ई. प्रान्तीय चुनाव में ये भारी बहुमत से विजयी हुए। जुलाई 1941 ई. में इन्हें गणित रक्षा सलाहकार समिति का सदस्य चुना गया। सन् 1945 ई. में इन्होंने पीपुल्स एजुकेशन सोसायटी की स्थापना की। मार्च 1952 ई.में इन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया और ये भारत सरकार के कानून मंत्री बने। 14 अक्टूबर, 1956 ई. को इन्होंने बौद्धधर्म ग्रहण कर लिया। 6 दिसम्बर 1956 ई. को इन्होंने बौद्धधर्म ग्रहण कर लिया। 6 दिसम्बर 1956 ई. को इनका देहान्त हो गया। भारत सरकार ने मरणोपरान्त उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने अनेक उल्लेखनीय कार्य किए। सन् 1924 ई में उनहोंने बहिष्कृत हितकारिणी सभा की स्थापना की जिसका उद्देश्य छुआछूत दूर करना था। इन्होंने सरकार द्वारा दलितों की सेना में भर्ती पर रोक को लेकर 20 मार्च, 1927 ई. का महाड़ में दलित सम्मेलन बुलाया। दलितों के हित के लिए लेजिस्लेटिव काउंसिल के लिए इन्हें सन् 1929 ई. में मनोनीत किया गया।

इन्होंने शिक्षा, मद्यनिषेध, कर व्यवस्था, महिला और बाल कल्याण विषयों पर कड़ा रुख अपनाया। इन्होंने प्रथम, द्वितीय व तृतीय गोलमेज सम्मेलन में दलितों का प्रतिनिधित्व किया। दलितों के उत्थान के लिए गांधी जी के साथ पूना पैक्ट किया। इनकी प्रमुख रचनाएँ द बुद्ध एण्ड हिज गोस्पेज, थाट्स आॅन पाकिसतान, रिवोल्यूशन्स एण्ड काउण्टर रिवोल्यूशन्स इन इण्डिया है।

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